" बस्ति चिकित्सा "
आयुर्वेद में बताए गये वात(वायु),पित्त, कफ तीनो दोषो में से वात(वायु) का प्रकोप होता है तब पाचनशक्ति मंद हो जाना,भूख कम लगना, पेट भरा हुआ लगना, थकान ज्यादा लगना,उत्साह कम होना,शरीर के संधि(Joints) दर्द करना,कमर दर्द होना,घुटनों का दर्द होना,पेट साफ न होना आदि लक्षण दिखाई देते हैं।
ये सब रोग या लक्षणों में राहत पाने हेतु आयुर्वेद का महान शस्त्र *बस्ति चिकित्सा* है।
क्या है ये बस्ति चिकित्सा?
बस्ति चिकित्सा पंचकर्म के पांच कर्मो में से एक कर्म है।बहुत सारे वैद्यगण *बस्ति चिकित्सा* को 50% चिकित्सा मानते है।
बस्ति चिकित्सा के अंतर्गत तीन कर्म होते है।
1) स्नेहन - शरीर पर औषधियुक्त तेल लगाया जाता है। ( *स्त्रियों के लिए अलग से स्त्री पंचकर्म आसिस्टन्ट उपलब्ध है।*)
2) स्वेदन- तेल लगाने के बाद औषधियुक्त बाफ(steam) दी जाती है।
3) बस्ति- शरीर के मलमार्ग से औषधियुक्त तेल या काढ़े को शरीर के अंदर डाला जाता है। ये दवाई 40 - 45 मिनट में मल के साथ बाहर आ जाती है। ये सारी प्रक्रिया में आपको किसी भी प्रकार की वेदना या तकलीफ नहीं होती और पूरे दिन जुलाब नही होते। संक्षिप्त में कहा जाय तो पूरे शरीर की शुद्धि (Detoxification Of Body) हो जाती है। ये चिकित्सा के साथ आप अपना रोज का कार्य कर सकते है।